राजा महमूदाबाद अब नहीं रहे /रंजन ज़ैदी
राजा महमूदाबाद से मेरा सम्बन्ध ननिहाल की तरफ़ से था. बचपन में मेरी माँ के लिए कहार या वाहक तीज-त्यौहार के मन्नत घड़े (जिनमें मिठाइयां होती थीं) बाड़ी (सीतापुर की तहसील सिधौली का एक क़स्बा) वाले सय्यदबाड़े में लाया करते थे. नाना, राजा के निजी सलाहकार थे. हमारा क़स्बा भी इसी राजशाही के अंदर आता था. बड़े अब्बा स्वर्गीय सैयद इश्तियाक़ हुसैन ज़ैदी रियासत महमूदाबाद में तहसीलदार हुआ करते थे. उन्हीं के ज़माने में मैं परिवार के साथ महमूदाबाद गया था. छोटा था, तब भी क़िले को देखकर बहुत अच्छा लगता था.
इधर दैनिक उर्दू 'सहाफ़त' ने राजा साहब पर कई छोटे-बड़े लेख, आलेख और टिप्पणियां प्रकाशित की हैं. उन्हीं में सुश्री नग़मा अमीर का एक लेख भी प्रकाशित हुआ है. उन्होंने राजा साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए लिखा है कि अंततः एक मुद्दत के बाद उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के द्वारा राजघराने की संपत्ति को उसके द्वारा बहाल कर दिया गया है. यह संपत्ति सुश्री नग़मा अमीर के लिखे अनुसार1962 में डिफेन्स ऑफ इण्डिया नियम के तहत दुश्मन की संपत्ति के रूप में कस्टोडियन कर दिया गया था. तब इस संपत्ति के वारिस तत्कालीन राजा खान बहादुर राजा मुहम्मद अमीर खान अपनी पत्नी और पुत्र को छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे.
गत 5 अक्टूबर, 2023 को नए वर्तमान राजा महमूदाबाद मुहम्मद अमीर खान उर्फ़ सलमान मियां का देहावसान हो गया लेकिन अदालतों में उनका संघर्ष मृत्यु पूर्व तक चलता रहा और यह संघर्ष सितम्बर 2023 के अंत में उच्च-न्यायलय पहुंचकर ख़त्म हो गया. इसमें सम्बंधित न्यायलय ने जो ऐतिहासिक फैसला सुनाया उसमें नैनीताल में 11 एकड़ प्राइम फ्लैट आराज़ी पर निर्मित मैट्रोपोल होटल जिसे अंग्रेज़ों से राजा ने 1920 में खरीदा था, जिसे 1919 में गवर्नर जनरल के लिए निर्मित कराया गया था तथा जिसे राजा साहब हेरिटेज होटल के रूप में परवर्तित कर उसे ऐतिहासिक बनाना चाहते थे, और जिसपर नैनीताल और लखनऊ के अभी भी कुछ बड़े बिल्डर्स का क़ब्ज़ा बना हुआ है.अनुमान है कि राजा महमूदाबाद की लगभग 25o करोड़ की संपत्ति का अधिग्रण किया जाना है.
ज़िले की यादों में बड़े खैराबाद स्थित प्रसिद्ध सूफी संत मक़बूल मियां की झोपडी में मेरा जाना हुआ था तब मैं लगभग 6 वर्ष का रहा हूँगा. मुझे गर्व है कि मैंने खैराबाद में उस महान सूफी संत के दर्शन किये थे, उनका आशीर्वाद भी लिया था.
पीले वस्त्रों में संत बाबा साहब का शरीर ऐसा था जैसे इगोई वृक्ष का सूखा तना. आँखों के सामने वह अक्सर आज भी कौंध जाते हैं. महमूदाबाद क़िले का अज़ीमुश्शान इमामबाड़ा आज भी अपने जाहोजलाल के साथ अवस्थित है. देश की आज़ादी और विभाजन के बाद देश के सांप्रदायिक ताक़तों के द्वारा इमामबाड़े की अज़मत को बहुत नुकसान पहुँचाया गया. वर्षों तक मुक़ददमें चलाये जाते रहे, अंततः न्याय की विजय हुई.
राजा साहब अब इस असार संसार से मुक्त हो चुके है लेकिन करोंङों लोगों के ह्रदय में उनकी यादें अभी भी बाक़ी हैं और आगे भी रहेंगीं.

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