शुक्रवार, 18 अगस्त 2023

एक फर्लांग का सफरनामा/ डॉ. रंजन ज़ैदीhttps://kathaanantah.blogspot.com/2023/08/blog-post_18.html

                                    एक फर्लांग का सफरनामा 
       सुश्री सोनिया गाँधी प्रधान-मंत्री नहीं बन पायेंगी. सुश्री सोनिया गाँधी जब प्रधान-मंत्री बन सकती थीं, ज्योतिषी स्वर्गीय राजेंद्र जैन ने मुझसे पूछा कि मैं लोगों को क्या बताऊँ? अपनी राय दो! चंद्रा-स्वामी को भी अपने महत्वपूर्ण हलके को अवगत कराना है, मैंने अपने पत्रकारिता के अनुभव, इंट्यूशन और सियासी-एनालिसिस के आधार पर बताया कि सुश्री सोनिया गाँधी प्रधान-मंत्री नहीं बन पायेंगी.  राजेंद्र जैन ने श्रीमती सोनिया की कुंडली मेज़ पर रखी, बताया, मेरा गणित भी यही बता रहा है, पर झिझक रहा हूँ. 

      मैंने तर्क से समझाया कि क्यों नहीं बन सकतीं! राजा ने चंद्रा-स्वामी को बता दिया कि कुंडली में राजयोग नहीं है. 'मामा' (चंद्रा-स्वामी का पीए) रात को पालिका केंद्र वाले ऑफिस में आये, और (बताया जाता है कि) ज्योतिषी जी को चंद्रास्वामी की तरफ से एक लाख रुपये मामा देकर लौट गए. तब मैं साप्ताहिक 'जनाधार भारती' का कार्यकारी संपादक हुआ करता था और ज्योतिषाचार्य राजेंद्र जैन पत्र साप्ताहिक 'जनाधार भारती' के संपादक.
                                                       
                                                          चर्चित पत्र-पत्रिकाएं
      'कथा-अनन्तः'  (वीडियो-न्यूज़ का साप्ताहिकी); हिंदी साहित्य की लोकप्रिय पत्रिका 'विश्व गाथा' अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, डाक से अंक आया तो औपचारिक रूप से पत्रिका को पढ़ने का अवसर मिला। साहित्य मनीषी, वरिष्ठ कवि-कथाकार, पत्रकार श्री पंकज त्रिवेदी इसके संपादक हैं, यही पत्रिका की पहचान है। 'साधना और ज्ञान-मार्ग' पर उनका अपना वैयक्तिक चिंतन है जिसे पढ़ा जाना चाहिए। सारांश यह कि, 'ज्ञानी ज्ञाता बहु मिले, 'पंडत' कवी अनेक, राम रटा निद्री जिता, कोटि मध्य एक।' सारांश यह कि 'ज्ञान-मार्ग पर चलते रहना ही जीवन का सार है।' 
       पत्रिका में पढ़ने के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक व अद्भुत लेख /आलेख हैं। सर्व-प्रथम 'राजस्थान के लोक-गीत' (जीतेन्द्र प्रसाद माथुर) को पढ़ना ज़रूरी है। शायद वह आलेख सतही दृष्टि से समझ में भी न आये लेकिन उसके शब्दों में कुछ 'कोड' हैं, हर कोड का एक इतिहास हैI शायद अजाने में लेखक ने इस जादू के पिटारे को (जो अलादीन के चिराग़ की हैसियत रखता है) साहित्य के कबाड़ में फ़ेंक दिया और संयोग से ढाई पेज का यह खज़ाना भाग्यशाली साहित्यकार-संपादक, कवि श्री पंकज त्रिवेदी के हाथ लग गया और उन्होंने उसे विश्व-गाथा में प्रकाशित कर दिया। 

      संयोग से वह भी इस रहस्य से अनजान थे कि ढाई पृष्ठ के इस कूट-पत्र में देश का ऐसा इतिहास छुपा हुआ है जो अनेक रहस्यों पर से परदे उठा सकता है, लोग विस्फारित नेत्रों से एक-दूसरे को देखते रह जायेंगे। इसके अध्ययन से जो महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं वह मूढ़ों की ऑंखें खोलने के समान हैं । इस आलेख में देश का अर्वाचीन भी है, प्राचीन भी। 

      जातियों-उप-जातियों, प्रजातियों के गमन, पलायन और देशज संस्कृतियों व जल, जंगल, ज़मीन की बोली और लोकगीतों का दर्द भी कानों में गूंजता महसूस होता है। बिच्छू के काट लेने पर पत्नी का पति से आग्रह कि वह उसकी मृत्यु के बाद पर-स्त्री से विवाह अवश्य कर ले ताकि उसे सांसारिक व समाजी कष्ट न हो। 
      
      राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र का लोक-गीत 'बिच्छुडो' इसका प्रमाण है। इसी तरह मारवाड़ के क्षेत्र में धुड़ला-पर्व पर गाया जाने वाला 'धुड़ला' लोकप्रिय गीत है,'घुड़लौ घूमै छै, जी घूमै छै।' जब महिलाएं यह लोकगीत गाती हैं तब उनके सिरों पर छेद वाला मिटटी का छोटा सा घड़ा होता है और उसमें एक दिया रौशन रहता है।

      इस तरह लोकगीतों में कुरजां, मोरिया, जैसलमेर का झोरावां लांगुरिया, हिचकी, सिथड़ें, भील स्त्रियों का गीत , कामड़, चिरमी आदि अनेक लोकगीतों ने स्वतः ही रहस्यों पर से परदे उठाये हैं और संकेत दिए हैं कि इस देश में और कितने देश बसे हुए हैं । शायद एक भारत में बहुत से गण, गढ़ की गढ़ैयों में छोटे-छोटे अनेक हिंदुस्तान और उनकी अपने-अपने क्षेत्र की हर 20 मील पर बदल जाने वाली बोलियां, कही-कहीं भाषाएँ, क़िस्से , लोकगीत, बयान, बैती, कथाएं कानों में शोर मचाने लगती हैं। 

      पत्रिकाओं की भीड़ में 'विश्व गाथा' अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर शायद एक नया इतिहास रचने का संघर्ष शुरू कर चुकी है, बधाई, आशीर्वाद भी`। 

      सुश्री निरुपमा सिंह की कहानी 'संजीवनी बूटी' और भाई सुशील स्वतंत्र की 'राम-रहीम हथकरघा' कहानियां पढ़ीं. दोनों की कहानियां पसंद आई. सात्विक-संबंधों में 'रिश्ते' कुटुंब-क़बीले और रक्त-गुण की पहचान ज़रूरी नहीं होती है. कहानियां भी खिड़की में जड़े 'कांच' की मानिंद लगीं जिनमें से झाँक कर हर पाठक एक दर्द की गली या ज़िन्दगी का बरसाती गलियारा देखने लग जाता है. दोनों को बधाई! 

       पत्रिका की 12 कहानियों में निरुपमा सिंह की कहानी 'सन्जीवनी बूटी', सुशील स्वतन्त्र की कहानी 'राम-रहीम हथकरघा स्तरीय कहानियां हैं. 

                                                                   वीडियो-बैठकें 
       'ख़ामोशी की नींव में .... / कहानी- रक्षिता; कच्ची भीड़ की मिटटी से गढ़ी बोसीदा बस्ती की निवासी एक नादान लड़की की यह द्वंद्वादात्मक कहानी है जो नए रोमांचित परिवेश में परवान चढ़कर कांक्रीट पर स्वतः ही फिसल जाती है और यहीं पर उसका लहूलहान होना ही तय हो जाता है. 
      
      यही त्रुटि कहानी की कमज़ोरी भी कमज़ोरी बन जाती है. समाज के अनेक कानूनों का उपयोग न किया जाना भी इसकी एक कमज़ोरी हो सकती है. चूंकि रक्षिता की यह पहली कहानी है. कमज़ोरियों के साथ ही सही, इसे क़ुबूल कर लिया जहाँ चाहिए. 
                             ज्योति : असम में इनकम टैक्स कमिश्नर
       खबर (स्टेटस न्यूज) अनाथ कन्या ज्योति, असम में इनकम टैक्स कमिश्नर हैं,  इस निष्ठुर संसार में सोबरन जैसे फ़रिश्ते और उनकी इंसानियत अभी ज़िंदा है. पड़ोस के देश में देखिये तो लोग रोज़ अपनों के ही सिर काटते रहते हैं. जेलों में बच्चियों और प्रतिभाओं के साथ हर रात बलात्कार करते हैं, घर उजाड़ते हैं, दीवारें फलाँगकर इज़्ज़तें और घर लूटते हैं, और दुनिया चुप है.
 
      हमारे देश में भी हर जगह देवता नहीं हैं, लेकिन दूत भी हैं. सोबरन जैसे फ़रिश्ते हर क़ौम में हैं. ग़ज़िआबाद के एक मुस्लिम परिवार ने एक हिन्दू लड़की को पालपोसकर बड़ा किया, पढ़ाया लिखाया, हिन्दू परिवार में ही उसका विवाह किया. 

      हमारा देश ऐसा ही है,  देश में अगर फ़रिश्ते हैं तो वहां दानव भी हैं, राक्षस भी. लेकिन असम के तिनसुखिया जिले के सब्ज़ी-फ़रोश भाई सोबरन जैसे देवताओं की भी कमी नहीं हैं. 

      एक लावारिस बच्ची जो 25 वर्ष घूरे पर पड़ी ज़िन्दगी  और मौत से जूझ रही थी, कुत्ते उसे नोच रहे थे, कि एक सब्ज़ी बेचने वाले फ़रिश्ते की नज़र जब उस बच्ची पर पड़ी तो वह व्यक्ति उसकी तरफ दौड़ पड़ा और कुत्ते भाग गए. 

      उस बच्ची को उसने दिन-रात जागकर, उसका इलाज कर, पुलिस से मांगकर उसे गोद ले लिया. statusnews.in की खबर के अनुसार अब वह असम में इनकम टैक्स असिस्टेन्ट कमिश्नर के पद पर कार्यरत है वही. अनाथ कन्या  statusnews.in के अनुसार अब 25 साल की हो गई है। 2013 में ज्योति ने कंप्यूटर साइंस से ग्रेजुएशन किया और 2014 में असम पब्लिक सर्विस कमीशन में सेलेक्ट हुईं। वो कहते हैं न, 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय...."   /- https://kathaanantah.blogspot.com/2023/08/httpskathaanantahblogspotcom202308blog.html
रंजन ज़ैदी/zaidi.ranjan20@gmail.com,https://kathaanantah.blogspot.com/2023/08/blog-post_18.html

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